चाँद उतर कर मेरे घर
आया नहीं ,
तुझसे जिंदगी मांगी थी
तेरा साया नहीं .....!
ये चिराग
जलता जलता मरेगा ,
अगर आकर तुने
बुझाया नहीं ........!
पानी तेरे चहरे का
दिल छू गया ,
पर मेरी आँखों पे
नजर आया नहीं ....!
डायरी पे लिखा मेरा
हर एक शब्द मुझे
दुनडेगाअगर डायरी के
उन "मधुर "पन्नो को मिटाया नहीं .!
चाँद उतर कर
कर मेरे घर आया नहीं ,
तुझसे जिंदगी मांगी थी
तेरा साया नहीं .....!
मधुकर (मधुर )
Wednesday, October 29, 2008
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