आज आम आदमी भी गुब्बारे की तरह ,
अन्दर अजीब सि गुब्बार लेकर बैठा है .....!
शर्म ही नचा रही है जिंदगी शायद , वर्ना
बहुत हलकी सी दीवार सजा कर बैठा है ...!
आज खामोशी है हमारे चारोतरफ मगर ,
आवाज एक भविष्य की फीजा मे छुपाकर बैठा है.!
जो रोकती है मुझे जीने से, ये जिंदगी उस की है ,
जाने किन -२ रिश्तो मैं खुदको फशा कर बैठा है !
समां मिलती नहीं और जमी हमें भाती नहीं ,
जाने क्या नविस्ता हाथो मे लिखाकर बैठा है ....!
कोई देख ना ले "मधुर"-रंग -हवा -ए-हुस्शन ,
जाने कैशे-२ रंग दिल मे छुपाकर बैठा है ..........!
आज आम आदमी भी गुब्बारे की तरह ,
अन्दर अजीब सि गुब्बार लेकर बैठा है .............!
मधुकर(मधुर)
Wednesday, October 29, 2008
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में
पाए खतो को आग ,
आग को धुआ धुआ को ,
हवा में मिलाने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में.....!
मुस्कराहट आइसी जैसे
चुस्की आग की ,
सफत से उतर कर
दिल-ए -घर आने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में......!
खनिज खुद खोजने ,
उसे खोलने और
उसे खुद गनिब बनाने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में....!
कुनबा लिखा प्यार से प्यार का
और खामा तोड़ दीं
आखरी शब्द चलाने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में....!
"मधुर " शब्द चुन्न्ने लिखने
और चीला चिला कर उन्न्हे "मधुर "
सुनाने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में....!
मधुकर (मधुर )
आग को धुआ धुआ को ,
हवा में मिलाने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में.....!
मुस्कराहट आइसी जैसे
चुस्की आग की ,
सफत से उतर कर
दिल-ए -घर आने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में......!
खनिज खुद खोजने ,
उसे खोलने और
उसे खुद गनिब बनाने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में....!
कुनबा लिखा प्यार से प्यार का
और खामा तोड़ दीं
आखरी शब्द चलाने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में....!
"मधुर " शब्द चुन्न्ने लिखने
और चीला चिला कर उन्न्हे "मधुर "
सुनाने में
कई सदिया लगेंगी तुम्हे भुलाने में....!
मधुकर (मधुर )
चाँद उतर कर
चाँद उतर कर मेरे घर
आया नहीं ,
तुझसे जिंदगी मांगी थी
तेरा साया नहीं .....!
ये चिराग
जलता जलता मरेगा ,
अगर आकर तुने
बुझाया नहीं ........!
पानी तेरे चहरे का
दिल छू गया ,
पर मेरी आँखों पे
नजर आया नहीं ....!
डायरी पे लिखा मेरा
हर एक शब्द मुझे
दुनडेगाअगर डायरी के
उन "मधुर "पन्नो को मिटाया नहीं .!
चाँद उतर कर
कर मेरे घर आया नहीं ,
तुझसे जिंदगी मांगी थी
तेरा साया नहीं .....!
मधुकर (मधुर )
आया नहीं ,
तुझसे जिंदगी मांगी थी
तेरा साया नहीं .....!
ये चिराग
जलता जलता मरेगा ,
अगर आकर तुने
बुझाया नहीं ........!
पानी तेरे चहरे का
दिल छू गया ,
पर मेरी आँखों पे
नजर आया नहीं ....!
डायरी पे लिखा मेरा
हर एक शब्द मुझे
दुनडेगाअगर डायरी के
उन "मधुर "पन्नो को मिटाया नहीं .!
चाँद उतर कर
कर मेरे घर आया नहीं ,
तुझसे जिंदगी मांगी थी
तेरा साया नहीं .....!
मधुकर (मधुर )
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