हमें चिरागी देते जाओ ,
अपने ही मजार पे ,
रोज चिराग
जलाया करेंगे हम.....
तुम्हे याद करने के
बहाने बहुत है ,
वादा बस इतना तुम्हे नहीं,
याद आया करेंगे हम .....!
नज़रे दूर तक नहीं जाती ,
जलते चिराग का धुँआ सही ,
तुम्हारे कशाने पर रोज
आया जाया करेंगे हम ...!
चाँद बगैर काटा है कई रात
खुमारी के ,
अब रोज रातो को जागा करेंगे ,
चाँद से निगाहे मिलाया करेंगे हम ....!
उम्मीद थी जहाँ से रौशनी की ,
इल्जाम-ए-इश्क देखो " मधुर''
अंधेरो मे काफिलों को रोज
रोशनी दिखाया करेंगे हम...!
मधुकर (मधुर )
Tuesday, December 9, 2008
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