Tuesday, December 9, 2008

"''चिरागी ''

हमें चिरागी देते जाओ ,
अपने ही मजार पे ,
रोज चिराग
जलाया करेंगे हम.....

तुम्हे याद करने के
बहाने बहुत है ,
वादा बस इतना तुम्हे नहीं,
याद आया करेंगे हम .....!

नज़रे दूर तक नहीं जाती ,
जलते चिराग का धुँआ सही ,
तुम्हारे कशाने पर रोज
आया जाया करेंगे हम ...!

चाँद बगैर काटा है कई रात
खुमारी के ,
अब रोज रातो को जागा करेंगे ,
चाँद से निगाहे मिलाया करेंगे हम ....!

उम्मीद थी जहाँ से रौशनी की ,
इल्जाम-ए-इश्क देखो " मधुर''
अंधेरो मे काफिलों को रोज
रोशनी दिखाया करेंगे हम...!

मधुकर (मधुर )

2 comments:

निर्झर'नीर said...

get together ki yaad taza kar di aapne ..
chiragii ...........

gyaneshwaari singh said...

bahut sunder khyaal hai apka....
gahrayee me jake likhte ho sadaa
acha laga
baki exam ke baad aram se padungi