इतना समझो "मधुर " की दुनिया में कोई नहीं है,
आंसु ही आंसू है वादिया अभी तक रोई नहीं है ..!
सूरज को अपनी और चाँद को अपनी फिकर है ,
टूटे तारो का यहाँ पर कोई नहीं है .....!
पानी तभी मिलेगा जब सावन आएगा ,
छा देने वाला यहाँ कोई नहीं है .........!
सजा सको तो सजा लो गम के कुछ और पन्ने "मधुर" ,
सुनने वाला यहाँ कोई नहीं है ...........!
इतना समझो "मधुर " की दुनिया में कोई नहीं है .......!
मधुकर (मधुर )
Tuesday, October 28, 2008
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2 comments:
kya bat hai
bhaut din me pada hai apko
acha laga
hum hai na yarra ..
kaise ho
as always good one
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